बहुत-सी NGOs को लगता है कि अगर उनका प्रस्ताव (Proposal) स्वीकार नहीं हुआ, तो गलती प्रस्ताव में ही थी। इसलिए वे उसे और बेहतर बनाने में लग जाती हैं। ज़्यादा आँकड़े जोड़ती हैं, कहानियाँ सुधारती हैं, डिज़ाइन बेहतर करती हैं और भाषा को और अच्छा बनाती हैं।
लेकिन ज़्यादातर बार समस्या प्रस्ताव में नहीं होती। असली वजह यह होती है कि प्रस्ताव गलत फंडर के पास भेज दिया गया। मान लीजिए कोई फंडर आमतौर पर ₹10–15 लाख की मदद देता है, और आप उससे ₹50 लाख की मदद माँग रहे हैं। ऐसे में आपका प्रस्ताव कितना भी अच्छा क्यों न हो, उसके मंज़ूर होने की संभावना बहुत कम है।
इसलिए फंडरेज़िंग का पहला कदम प्रस्ताव लिखना नहीं है। पहला कदम है यह देखना कि जिस फंडर के पास आप जा रहे हैं, क्या वह आपकी संस्था के लिए सही है या नहीं।
ऐसा क्यों होता है?
छोटी NGOs को हमेशा पैसों की ज़रूरत रहती है। इसलिए उन्हें लगता है कि जितने ज़्यादा फंडर्स को प्रस्ताव भेजेंगे, उतना अच्छा होगा। यह सोचना गलत नहीं है। लेकिन बिना सोचे-समझे हर जगह आवेदन करने से आपका समय ज़्यादा बर्बाद होता है।
अक्सर एक ही व्यक्ति कई काम कर रहा होता है। वही कार्यक्रम देखता है, रिपोर्ट लिखता है, दानदाताओं से बात करता है, कागज़ी काम संभालता है और प्रस्ताव भी लिखता है। लेकिन बात सिर्फ़ लोगों की कमी की नहीं है। ज़्यादातर NGOs को किसी ने यह बताया ही नहीं कि फंडरेज़िंग करने का एक बेहतर तरीका भी होता है।
जब कोई नई फंडिंग का मौका आता है, तो पहला सवाल होता है: “क्या हम समय पर प्रस्ताव पूरा कर पाएँगे?” लेकिन इससे भी ज़रूरी सवाल है: “क्या हमें इस फंडर के पास आवेदन करना भी चाहिए?” अगर आप इस सवाल का जवाब पहले ढूँढ़ लें, तो कई दिनों की मेहनत बच सकती है।
फंडर को समझने का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि प्रस्ताव लिखने से पहले यह देखना कि क्या वह फंडर आपकी संस्था के लिए सही है। इसे ऐसे समझिए जैसे आप किसी कॉलेज में दाख़िला लेना चाहते हैं। आवेदन भरने से पहले आप देखते हैं:
- क्या वहाँ वही कोर्स है जो आप पढ़ना चाहते हैं?
- फीस कितनी है? क्या छात्रवृत्ति (Scholarship) मिलती है?
- क्या आपके अंक वहाँ दाख़िले के लिए काफ़ी हैं?
अगर जवाब “नहीं” है, तो आप घंटों आवेदन भरने में समय नहीं लगाएँगे। फंडरेज़िंग भी बिल्कुल ऐसी ही है। पहले देखिए कि फंडर आपके लिए सही है या नहीं, फिर प्रस्ताव लिखिए।
प्रस्ताव लिखने से पहले ये 5 सवाल पूछिए
1. क्या यह फंडर हमारे जैसे काम को मदद देता है?
अगर आपकी संस्था शिक्षा पर काम करती है, लेकिन फंडर सिर्फ़ स्वास्थ्य पर काम करने वाली संस्थाओं को मदद देता है, तो शायद यह सही जगह नहीं है।
2. यह फंडर आमतौर पर कितनी राशि देता है?
अगर वह हमेशा बड़े प्रोजेक्ट्स को फंड करता है और आप छोटे प्रोजेक्ट के लिए मदद माँग रहे हैं, तो संभावना कम हो सकती है।
3. यह किन राज्यों या इलाकों में काम करता है?
कई फंडर्स सिर्फ़ कुछ राज्यों या ज़िलों में ही काम करते हैं। आवेदन करने से पहले यह ज़रूर देखिए।
4. क्या हमारी जैसी संस्था आवेदन कर सकती है?
कुछ फंडर्स सिर्फ़ कई साल पुरानी संस्थाओं को फंड देते हैं। कुछ छोटी और नई संस्थाओं के साथ भी काम करते हैं। पहले यह समझिए कि आपकी संस्था उनके नियमों में फिट बैठती है या नहीं।
5. उन्होंने पहले किन संस्थाओं को मदद दी है?
देखिए कि उन्होंने पहले किन NGOs के साथ काम किया है। क्या वे आपकी संस्था जैसी हैं? अगर हाँ, तो यह अच्छा संकेत है। हो सके तो उनसे बात करके उनका अनुभव भी जानिए।
सिर्फ़ फंडर की वेबसाइट देखकर फैसला मत कीजिए। इन चीज़ों को भी देखिए:
- उनके सोशल मीडिया पेज
- उन्होंने हाल में किन प्रोजेक्ट्स को मदद दी है
- वे किन NGOs के साथ काम करते हैं
- अभी उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताएँ क्या हैं
इससे आपको समझ आएगा कि आपकी संस्था उनके लिए सही है या नहीं।
अपना एक आसान फंडर मैप बनाइए
इसके लिए किसी महंगे सॉफ़्टवेयर की ज़रूरत नहीं है। एक साधारण Excel शीट या Google Sheet भी काफ़ी है। उसमें ये जानकारी लिखिए:
- फंडर का नाम
- वह किन विषयों पर काम करता है
- वह कहाँ काम करता है
- वह आमतौर पर कितनी राशि देता है
- उसने पहले किन NGOs को फंड दिया है
- आपकी संस्था उसके लिए कितनी सही है (ज़्यादा, थोड़ा, या कम)
धीरे-धीरे यही आपकी अपनी फंडर सूची बन जाएगी। हर नई जानकारी जोड़ते रहिए। इससे आगे चलकर सही फंडर चुनना बहुत आसान हो जाएगा।
सबसे ज़रूरी बात
फंडर के बारे में जानकारी जुटाने से यह पक्का नहीं हो जाता कि आपको फंड मिल ही जाएगा। लेकिन इससे आप उन प्रस्तावों पर समय बर्बाद नहीं करेंगे जिनके सफल होने की संभावना शुरू से ही बहुत कम थी। अच्छी फंडरेज़िंग का मतलब हर जगह आवेदन करना नहीं है।
अच्छी फंडरेज़िंग का मतलब है पहले यह समझना कि कौन-सा फंडर आपकी संस्था के लिए सही है, और फिर उसी के लिए प्रस्ताव तैयार करना। यही तरीका आपका समय बचाता है और सही लोगों तक सही प्रस्ताव पहुँचाने में मदद करता है।